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2019-03-11T11:47:27

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Benefits of yoga Maintaining a regular yoga practice can provide physical and mental health benefit. “The purpose of yoga is to build strength, awareness and harmony in both the mind and body, ” explains Natalie Nevins, DO, a board-certified osteopathic family physician and certified Kundalini Yoga instructor in Hollywood, California. While there are more than 100 different types, or schools, of yoga, most sessions typically include breathing exercises, meditation, and assuming postures (sometimes called asana or poses) that stretch and flex various muscle groups. “As an osteopathic physician, I focus a lot of my efforts on preventive medicine and practices, and in the body’s ability to heal itself, ” says Dr. Nevins. “Yoga is a great tool for staying healthy because it’s based on similar principles.” Physical benefits “The relaxation techniques incorporated in yoga can lessen chronic pain, such as lower back pain, arthritis, headaches and carpal tunnel syndrome, ” explains Dr. Nevins. “Yoga can also lower blood pressure and reduce insomnia.” Other physical benefits of yoga include: increased flexibility increased muscle strength and tone improved respiration, energy and vitality maintaining a balanced metabolism weight reduction cardio and circulatory health improved athletic performance protection from injury Mental benefits Aside from the physical benefits, one of the best benefits of yoga is how it helps a person manage stress, which is known to have devastating effects on the body and mind. “Stress can reveal itself in many ways, including back or neck pain, sleeping problems, headaches, drug abuse, and an inability to concentrate, ” says Dr. Nevins. “Yoga can be very effective in developing coping skills and reaching a more positive outlook on life.” Yoga’s incorporation of meditation and breathing can help improve a person’s mental well-being. “Regular yoga practice creates mental clarity and calmness; increases body awareness; relieves chronic stress patterns; relaxes the mind; centers attention; and sharpens concentration, ” says Dr. Nevins. Body- and self-awareness are particularly beneficial, she adds, “because they can help with early detection of physical problems and allow for early preventive action.”
2019-03-09T09:08:07

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Future in BBA With the greater rise in the modernization and globalization, most of the organizations are expanding and thus graduates with the ability to help in the scaling up the operations are highly wanted by the big MNCs. And BBA grads has the much higher ability to perform in these tasks than anyone else and hence making it possible for a person with a BBA degree to help in the operations. Thus making the BBA as one of the important parts of the modern organizations. Average salary Joining this field has its own perks. From offering a good exposure to the interesting and creative job profile, the field also gives you some of the greater perks and a handsome salary. On considering the modern statistics the estimated salary of a professional starting his career after pursuing BBA is around 2 to 4 lakhs per anum. And after gaining a relevant experience this salary can be stacked up to the 10 to 12 lakhs per year with an estimated growth in the career. Employment Roles There are a number of parts in an organization where the candidates who have a professional degree in business administration are required. These areas involves from smallest of the operation to taking out whole analysis of the organization. As per the specialization in which the graduation is pursued the area can be choose to have a future in it. Some of the major areas that offer a nice experience to candidates with the BBA degree are as follow as: Banks Professional Organizations and MNC’s Marketing organizations Educational Areas and bodies Logistics Companies E-commerce organizations Data analysis Organization Consulting Firms Finance and Investment Firms Conclusion On considering all the above-mentioned aspects that are available for a person who has pursued the BBA as a fulltime graduation course for starting his professional career, chances of getting a good job with a nice growth rate and a good position in the industry are very much there. As well as, making it possible to grow and learn in a more creative environment for the entire career and thus making the best of the knowledge.
2019-02-28T12:16:12

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आर्किटेक्चर में करियर क्या आप जानते हैं, विश्व प्रसिद्ध होटल ताज, ताजमहल, स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी, पीसा की झूकी हुई मीनार, लोट्स टेंपल, राष्ट्रपति भवन, अक्षरधाम मंदिर आदि में क्या समानताएं हैं? जिसकी सुंदरता के देखकर हर कोई कहता है वाह! क्या डिजाइन है। दरअसल, इन जीचों में एक ही समानता है, ये सभी बेजोड़ आर्किटेक्चर का नमूना है। आज भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी तेज है और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काफी पैसा भी लगया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कम समय में खूबसूरत और गुणवत्तापूर्ण बिल्डिंग तैयार करने के लिए आर्किटेक्चर की जरूरत बढ़ती जा रही है। यदि आप भी बिल्डिंग की खूबसूरती में चार चांद लगाना चाहते हैं, तो आर्किटेक्चर का कोर्स कर सकते हैं। क्वालिफिकेशन फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ से बारहवीं करने के बाद ग्रेजुएट लेवल पर आर्किटेक्चर कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। बी.ऑर्क कोर्स के लिए द काउंसिल ऑफ ऑर्किटेक्चर ऑल इंडिया बेसिस पर परीक्षा का आयोजन करती है। बी.ऑर्क कोर्स पांच वर्ष का होता है। अधिकतर संस्थान में प्रवेश लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। बी.ऑर्क कोर्स करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएट ऑकिटेक्चर कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जो खुद एंटेंस टेस्ट का आयोजन करती है, तो कुछ 12वीं में हासिल अंक के आधार पर भी एडमिशन देती है। कौन-कौन से कोर्स इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक छात्र दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर सकते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित पॉलीटेक्निक संस्थान, नई दिल्ली स्थित कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल समेत ऐसे और भी कई संस्थान हैं जो सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करवाते हैं। डिप्लोमाधारी युवा पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर में जूनियर इंजीनियर की जॉब के लिए आवेदन कर सकते हैं। आर्किटेक्चरल डिजाइनिंग में अन्य लोकप्रिय कोर्स हैं, बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क), एम आर्क तथा सिविल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक डिग्री। बीआर्क में दाखिले के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से साइंस (फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स) विषय में न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं या इसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसमें चयन अमूमन आईआईटीजेईई, एआईईईई जैसी प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से होता है। हालांकि प्रत्येक राज्य अपने यहां शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए अलग से प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं, वहीं निजी इंजीनियरिंग कॉलेज भी अपने स्तर पर एंट्रेस टेस्ट आयोजित करते हैं अथवा आईआईटीजेईई या एआईईईई स्कोर्स को दाखिला देते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर छात्र चाहें तो एमई या एमटेक कर सकते हैं। देश के कई इंजीनियरिंग कॉलेज व विश्वविद्यालयों में यह कोर्स उपलब्ध हैं। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में छात्र आर्किटेक्चर के बैचलर, मास्टर या डॉक्टोरल कोर्स को कर सकते हैं। इसके अलावा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स की एसोसिएट मेंबरशिप के लिए एएमआईई नामक एक एग्जाम भी होता है, जो कामकाजी प्रोफेशनल्स या डिप्लोमाधारी को दूरस्थ शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग की बैचलर डिग्री हासिल करने की सुविधा देता है। छात्र चाहें तो खास तरह के ढांचों या इमारतों मसलन अस्पताल, शॉपिंग मॉल, आवासीय कॉलोनी, स्कूल, कॉलेज, होटल आदि की डिजाइनिंग में विशेषज्ञता भी हासिल कर सकते हैं। स्पेशलाइजेशन पोस्ट गे्रजुएशन लेवल पर आप ऑकिटेक्चर में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। स्पेशलाइजेशन के रूप में आप अर्बन डिजाइन, रीजनल प्लानिंग, बिल्डिंग इंजीनियरिंग ऐंड मैनेजमेंट, आर्किटेक्चरल कंजर्वेशन, इंडस्ट्रियल डिजाइन, लैंडस्केप ऑकिटेक्चर, नेवल ऑर्किटेक्चर आदि विषयों का चयन कर सकते हैं। क्या करते हैं ऑर्किटेक्ट्स आमतौर पर ऑर्किटेक्ट का काम किसी बिल्डिंग या स्ट्रक्चर के लिए प्लानिंग के साथ-साथ डिजाइन तैयार करना होता है। ऑर्किटेक्ट क्लाइंट की बजट के अनुरूप कंस्ट्रक्शन की प्लानिंग करने में माहिर होते हैं। वैसे आज के दौर में ऑकिटेक्ट पर कम से कम समय में गुणवत्तापूर्ण डिजाइन तैयार करने के साथ-साथ ईको फ्रेंडली कंस्ट्रक्शन तैयार करने का दवाब दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। कौन बन सकता है बेहतर ऑर्किटेक्ट जिन स्टूडेंट्स की पकड फिजिक्स और मैथ विषय पर अच्छी होती है, वे इस क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकते हैं। खासबात यह है कि स्टूडेंट्स में स्के्रच और डिजाइन तैयार करने के प्रति रूचि होनी जरूरी है। कई बार ऑर्किटेक्ट को लीगल वर्क भी करना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि कानून की भी कुछ-न-कुछ जानकारी अवश्य हो। एक ऑर्किटेक्ट की अच्छी कम्युनिकेशन स्किल के साथ-साथ डेस्क और साइट पर काम करने की भी काबिलियन होनी चाहिए। खूब हैं अवसर आर्किटेक्ट्स के लिए प्राइवेट व पब्लिक सेक्टर में रोजगार पाने की काफी संभावनाएं हैं। पब्लिक सेक्टर की बात करें तो लोक निर्माण, सिंचाई, स्वास्थ्य जैसे विभागों में आर्किटेक्ट की मांग लगातार बनी हुई है। यदि कोई आर्किटेक्ट को पेशे के तौर पर नहीं अपनाना चाहता, तो वह इंजीनियरिंग व आर्किटेक्चर कॉलेजों में अध्यापन का विकल्प भी अपना सकता है। हालांकि इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए सरकारी सेक्टर के मुकाबले प्राइवेट सेक्टर में रोजगार की बेहतर संभावनाएं हैं। आप चाहें तो बतौर आर्किटेक्ट अपनी सलाहकार फर्म स्थापित कर सकते हैं या कांट्रेक्टर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स जो स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहते हैं या सरकारी नौकरी करना चाहते हैं, उन्हें काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए) में अपना रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। सीओए एक सरकारी निकाय है। विदेशों में भी इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बेहतर संभावनाएं हैं। कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में बडे पैमाने पर हो रहे इन्वेस्टमेंट के कारण ऑकिटेक्चर की डिमांड लगातार बढती जा रही है। जानकारों की मानें, तो भारत में ऑकिटेक्चर की मांग और सप्लाई में अभी भी काफी अंतर है। यदि एम्प्लॉयमेंट ऑपरचुनिटी की बात करें, तो प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ गवर्नमेंट सेक्टर में भी अच्छी है। गवर्नमेंट सेक्टर में आर्किओलॉजिकल डिपार्टमेंट, मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस, डिपॉर्टमेंट ऑफ रेलवे, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, नेशनल बिल्डिंग ऑर्गनाइजेशन, टाउन ऐंड कंट्री प्लानिंग ऑर्गनाइजेशन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लि., सिटी डेवलॅपमेंट अथॉरिटी आदि में रोजगार के अवसर होते हैं। इसके अलावा, लोकल एजेंसी, स्टेट डिपार्टमेंट, हाउसिंग में भी नौकरी की तलाश कर सकते हैं। यदि आप कुछ वर्षों का अनुभव हासिल कर लेते हैं, तो कंसल्टेंट और कंस्ट्रक्टर के रूप में खुद के बिजनेस की शुरूआत भी कर सकते हैं। दमदार सैलरी ऑकिटेक्ट के रूप में जॉब की शुरुआत करने पर आपकी सैलरी 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह हो सकती है। हालांकि सैलरी ऑर्गनाइजेशन के आकार और आपके अनुभव पर भी डिपेंड करती है। दो से चार साल के अनुभव के बाद आपकी मासिक सैलरी 30हजार रुपये से अधिक हो सकती है। इंस्टीट्यूट वॉच u स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली u पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ u स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर सीईपीटी, अहमदाबाद u लखनऊ यूनिवर्सिटी, यूपी u गोवा यूनिवर्सिटी, गोवा u यूनिवर्सिटी ऑफ मुम्बई, मुम्बई u इंडियन एजुकेशन सोसायटीज कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, बांद्रा, मुम्बई u पुणे यूनिवर्सिटी, पुणे u जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद u बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज, हावडा, वेस्ट बंगाल
2019-02-28T12:13:20

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आर्कियोलॉजी में करियर हरेक सभ्यता और संस्कृति की अपनी पहचान होती है। उसका इतिहास भी अलग होता है। ऐसा माना जाता है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की सभ्यता मेसोपोटामिया और इजिप्ट की तुलना में काफी विकसित थी। करियर एक्सपर्ट के मुताबिक वक्त के साथ-साथ अलग-अलग सभ्यताओं के बारे में निरंतर हो रहे अध्ययन से उनके इतिहास के बारे में दिलचस्प और रोचक जानकारी मिलती है। इसके जरिए ही आप अलग-अलग दौर की संस्कृति, मान्यताओं और पर्यावरण के बारे में नई-नई जानकारी हासिल कर सकते हैं। इतिहास में गहरी रुचि रखने वाले छात्रों के लिए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं। क्वालिफिकेशन और कोर्स बारहवीं के बाद बैचलर ऑफ ऑर्कियोलॉजी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। ऑर्कियोलॉजी में डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर और पीएचडी कोर्स उपलब्ध हैं। इससे जुड़े कोर्स देश के प्रमुख संस्थानों से कर सकते हैं। ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ऑर्कियोलॉजी (दो वर्षीय) कर सकते हैं। दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च ऐंड मैनेजमेंट ऑर्कियोलॉजी में दो स्पेशल प्रोग्राम्स ऑफर कर रहे हैं। मास्टर इन कंजर्वेशन, प्रिजर्वेशन ऐंड हेरिटेज मैनेजमेंट और मास्टर इन ऑर्कियोलॉजी ऐंड हेरिटेज मैनेजमेंट। यदि आप विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं, तो हिस्टोरिकल ऑर्कियोलॉजी, जिओ ऑर्कियोलॉजी, ऑर्कियोबॉटनी, क्रोनॉलॉजिकल, एथनोऑर्कियोलॉजी, एक्सपेरिमेंटल ऑर्कियोलॉजी, ऑर्कियोमेट्री आदि कर सकते हैं। क्या करते है ऑर्कियोलॉजिस्ट ऑर्कियोलॉजिस्ट का कार्य कुछ अलग तरह का होता है। किसी सभ्यता के बारे में जानकारी जुटाने के साथ-साथ पुराने धरोहरों को सहेजने का भी काम करते हैं ऑर्कियोलॉजिस्ट। साथ ही, इनकी जिम्मेदारी पुराने बर्तन, मोती की जानकारी से लेकर एक पूरे शहर की संस्कृति को खंगालने का हो सकता है। खासतौर पर सभ्यताओं के बारे में जानने के लिए जानवरों की हड्डी, प्राचीन मंदिर, भवन, मानव अवशेष आदि की मदद ली जाती है। इसके अलावा, ऑर्किफैक्ट्स (बर्तन, मोती, प्लेट आदि) को हासिल करने के साथ-साथ, उसकी सफाई, संरक्षण और उसके जरिए पता लगाया जाता है पुरानी सभ्यताओं के बारे में। कहां मिल सकती है नौकरी करियर काउंसलर अनिल सेठी के मुताबिक, तीन ऐसे क्षेत्र हैं, जहां ऑर्कियोलॉजिस्ट के लिए जॉब की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं : टीचिंग, रिसर्च और म्यूजियम। यदि आप रिसर्च के एरिया में जॉब करना चाहते हैं, तो ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, प्लानिंग कमीशन आदि में अवसर तो हैं ही, साथ ही इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन यूनिस्को और यूनिसेफ में भी काम कर सकते हैं। दूसरी तरफ नेशनल म्यूजियम(नई दिल्ली), स्टेट म्यूजियम, नेशनल ट्रस्ट ऑफ ऑर्ट ऐंड कल्चर हेरिटेज आदि में भी ऑर्कियोलॉजिस्ट की मांग होती है। इसके अलावा, टीचिंग में भी शानदार करियर है। यूपीएससी एग्जाम के जरिए आप सरकारी नौकरी भी हासिल कर सकते हैं। सैलरी पैकेज इस क्षेत्र में सैलरी अनुभव और शिक्षा पर भी निर्भर करती है। आमतौर पर ऑर्कियोलॉजिस्ट की सैलरी आठ से 15 हजार रुपये से शुरू होती है। वैसे, टीचिंग के क्षेत्र में काम करने पर 15 से 20 हजार रुपये तक प्रति माह कमाई कर सकते हैं। इंस्टीट्यूट वॉच u ऑकियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, नई दिल्ली www.asi.nic.in u नेशनल आर्काइव्ज ऑफ इंडिया, नई दिल्ली www.nationalarchives.nic.in u इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च, नई दिल्ली www.ichrindia.org u बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी www.bhu.ac.in u दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च ऐंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली http://www.dihrm.com u जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर www.jiwaji.edu u पटना यूनिवर्सिटी, पटना http://puonline.bih.nic.in u पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ www.puchd.ac.in u इलाहाबाद, यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद www.allduniv.ac.in
2019-02-27T12:50:46

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आईटी में करियर पूरी दुनिया, खासकर अमेरिका में जहां सब-प्राइम संकट के चलते जहां कॉर्पोरेट सेक्टर में मंदी छाई है, वहीं भारतीय आईटी कंपनियां इस संकट के बावजूद मुनाफा कमाने में कामयाब रही हैं। इसका कारण यही है कि भारतीय आईटी और बीपीओ कंपनियों को आज भी दुनिया भर से खूब काम मिल रहा है। टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, सत्यम आदि जैसी तमाम कंपनियों ने अपना जलवा बरकरार रखा है। यही वजह है कि जॉब मार्केट में आज भी यह सेक्टर हॉट बना हुआ है। 12वीं के बाद एंट्री ऐसा नहीं है कि आईटी सेक्टर में केवल उच्च योग्यता (जैसे-आईटी या सीएस में बीटेक, बीसीए या एमसीए आदि) वाले लोगों की ही जरूरत है। इस सेक्टर में 12वीं के बाद भी डेढ़ से दो साल का जॉब-ओरिएंटेड कोर्स (खासकर हार्डवेयर-नेटवर्किंग से संबंधित) करके प्रवेश पाया जा सकता है। अवसर हैं बेशुमार आईटी वर्ल्ड में तमाम तरह के कार्य होते हैं। यहां सैलॅरी भी अच्छी है। यही वजह है कि युवाओं के बीच इस तरह के कोर्सों का जबर्दस्त क्रेज है। इस समय, जबकि बारहवीं की परीक्षाएं समाप्त हो गई हैं, छात्रों के सामने अभी से आईटी दुनिया में प्रवेश करने का अच्छा अवसर है। आईटी वर्ल्ड के किन-किन प्रमुख क्षेत्रों में स्किल्ड मैन पॉवर की जरूरत है, आइए डालते हैं इस पर एक नजर... सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट यह आईटी सेक्टर का सबसे प्रमुख कार्य है। दुनिया का कोई भी कम्प्यूटर विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर्स की मदद से ही चलता है। सॉफ्टवेयर बनाने और डेवलॅप करने का कार्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और प्रोग्रामर्स करते हैं। इनका प्रमुख कार्य विभिन्ना लैंग्वेजेज में सॉफ्टवेयर डेवलॅप करना होता है। दरअसल, सॉफ्टवेयर दो तरह के होते हैं-ऐप्लिेकेशन सॉफ्टवेयर और सिस्टम सॉफ्टवेयर। इनकी मदद से ही कई तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज तैयार किए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया भर की तमाम कंपनियां करती हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट के लिए नॉलेज को हर समय अपडेट करते रहने की जरूरत होती है। इसके अलावा प्रमुख प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज, जैसे-सी, सी++, जावा, विजुअल बेसिक आदि में विषेषज्ञता भी हासिल करनी होती है। सिस्टम एनालिस्ट सिस्टम एनालिस्ट कम्प्यूटर डेवलॅप करने की योजना बनाते हैं। यदि आप सिस्टम एनालिस्ट के रूप में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको हर तरह के सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर की जानकारी रखनी होगी और इसे नियमित रूप से अपडेट भी करते रहना होगा। सिस्टम एनालिस्ट ग्राहकों की बिजनेस जरूरतों को समझते हुए भी सिस्टम तैयार करने में कुशल होते हैं। सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर इनका मुख्य काम कनेक्टिविटी और इंटरनेट की सुविधा प्रदान करना होता है। आईटी सेक्टर में नेटवर्किंग काफी महत्वपूर्ण होता है। इसके माध्यम (लैन, वैन या मैन के माध्यम से) से कम्प्यूटर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और एक कम्प्यूटर का डाटा सर्वर के माध्यम से दूसरे कम्प्यूटर में देखा और ट्रांसफर किया जा सकता है। यही कारण है कि आज हर छोटे-बड़े संस्थान में कम्प्यूटर नेटवर्किंग के लिए सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत होती है। हालांकि इस फील्ड में काम करने वालों को सिस्टम सिक्योरिटी के साथ-साथ नेटवर्किंग सिक्युरिटी का भी ध्यान रखना होता है। इसके अलावा, आप इस फील्ड में कैड स्पेशलिस्ट, सिस्टम आर्किटेक्ट, विजुअॅल डिजाइनर, एचटीएमएल प्रोग्रामर, डोमेन स्पेशलिस्ट, इंफॉर्मेशन सिक्युरिटी एक्सपर्ट, इंटीग्रेशन स्पेशलिस्ट, कम्युनिकेशन इंजीनियर, सेमीकंडक्टर स्पेशलिस्ट आदि के रूप में भी काम कर सकते हैं। डाटा बेस डाटा बेस के अंतर्गत डाटा को इस प्रकार स्टोर किया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें आसानी से इस्तेमाल एवं अपडेट किया जा सके। किसी भी कंपनी के लिए उसका डाटा काफी महत्वपूर्ण होता है। इसे देखते हुए डाटा बेस प्रोफेशनल्स की मांग भी बहुत ज्यादा है। हार्डवेयर कम्प्यूटर के लिए जितना जरूरी सॉफ्टवेयर है, उतना ही जरूरी हार्डवेयर भी है। हार्डवेयर का मतलब होता है कम्प्यूटर की सारी मशीनरी। इसमें सीपीयू, मदरबोर्ड, हार्डडिस्क से लेकर अन्य सभी चीजें आ जाती हैं। हार्डवेयर इंजीनियरिंग कम्प्यूटरों को चुस्त-दुरुस्त रखने में माहिर होते हैं। क्या करें आप आप अपनी योग्यता, रुचि, क्षमता और जरूरत के मुताबिक सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में कोई भी फील्ड चुन सकते हैं। लेकिन यदि आप सॉफ्टवेयर का फील्ड चुनते हैं, तो आपको इसमें उच्च योग्यता हासिल करनी होगी, जबकि हार्डवेयर का क्षेत्र चुनने पर आप महज डेढ़-दो साल की क्लास और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेकर जॉब मार्केट में एंट्री पा सकते हैं। ग्रेजुएट लेवॅल कोर्स: इस लेवॅल पर प्रमुख कोर्स इस प्रकार हैं-बीटेक, बीसीए, बीएससी आदि। बीटेक (आईटी, सीएस आदि) चार वर्षीय कोर्स है, जो आईआईटी तथा अन्य इंजीनियंरिंग कॉलेजों में चलाया जाता है। इसमें बारहवीं (पीसीएम) के बाद एंट्रेंस के माध्यम से प्रवेश मिलता है। इसके अलावा, बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन यानी बीसीए और बीएससी (आईटी या कम्प्यूटर सांइस) तीन वर्षीय कोर्स हैं और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हैं। पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स: इसमें एमटेक, तीन वर्षीय मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन यानी एमसीए का फुलटाइम कोर्स होता है। छात्रों को एक बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि बीसीए या एमसीए उसी संस्थान से करें, जिसे ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई से मान्यता हासिल हो। हार्डवेयर-नेटवर्किंग कोर्स : आजकल हर छोटे-बड़े ऑफिस में कम्प्यूटर की अनिवार्यता को देखते हुए हार्डवेयर-नेटवर्किंग एक्सपर्ट्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। यह कोर्स सरकारी संस्थानों के अलावा बड़ी संख्या में निजी संस्थाओं द्वारा कराया जा रहा है। इस तरह के कोर्सों में कम्प्यूटर असेंबल करने, रिपेयर करने एवं खराब उपकरणों को बदलने या उन्हें ठीक करने की ट्रेनिंग दी जाती है। इंस्टीट्यूट वॉच -ए-सेट कम्प्यूटर ट्रेनिंग ऐंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली -आईएचटी, नई दिल्ली -एप्टेक कम्प्यूटर एजुकेशन, साउथ एक्सटेंशन, नई दिल्ली -जीटी कम्प्यूटर हार्डवेयर इंजीनियरिंग कॉलेज, हिसार, -आईआईएचटी, रोहतक -जेटकिंग, रोहतक
2019-02-25T12:10:38

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12वीं के बाद स्टूडेंट्स असमंजस में रहते हैं कि आगे क्या करें और क्या नहीं? एेसी स्थिति में कई बार गलत जानकारी के कारण वे गलत दिशा में बढ़ जाते हैं, जिससे उनका करियर भी चौपट हो जाता है। आइए, आपको आट्र्स सब्जेक्ट से जुड़े कुछ ऐसे ही कोर्स के बारे में बताते हैं, जहां 12वीं के बाद आपका फ्यूचर बेहतर हो सकता है... आमतौर पर 12वीं के बाद स्टूडेंट्स के मन में यही खयाल आता है कि साइंस या कॉमर्स से ग्रेजुएशन करेंगे, तो भविष्य में नौकरी की अच्छी संभावनाएं रहेंगी, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। आज आट्र्स सब्जेक्टर से ग्रेजुएशन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी करियर के कई रास्ते खुल चुके हैं। बीए (साइकोलॉजी) करने के बाद एमए साइकोलॉजी कर लें, तो साइकोलॉजिस्ट के रूप में करियर बनाया जा सकता है। बीए सोशलॉजी से करने के बाद एनजीओ, सामाजिक संगठनों जॉब की तलाश की जा सकती है। वहीं एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) में भी युवाओं के लिए करियर का एक अच्?छा ऑप्शन है। सिविल सर्विसेज, जर्नलिज्म आदि क्षेत्रों में भी आट्र्स से विषय से पढ़ाई के बाद करियर बनाया जा सकता है। अगर आप फॉरेन लैंग्वेज का कोर्स कर लेते हैं, तो ट्रैवल एंड टूरिज्म विभाग में भी रोजगार की संभावनाएं होती हैं। आइए, आपको बताते हैं 12वीं के बाद आट्र्स सब्जेक्ट में कहां है करियर के ऑप्शंस... म्यूजिक फील्ड तमाम टेलीविजन चैनल्स पर हो रहे म्यूजिकल टैलेंट हंट शो के प्रति युवाओं का उत्साह आज देखते ही बनता है। कुछ वर्ष पहले तक म्यूजिक को हॉबी या पार्ट-टाइम के रूप में ही अपनाया जाता था, लेकिन मनोरंजन की दुनिया में आई क्रांति के कारण इस क्षेत्र के प्रति युवाओं में जबरदस्त क्रेज देखा जाने लगा है। खास बात यह है कि ग्लोबल म्यूजिक इंडस्ट्री आज वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से विकास कर रहे क्षेत्रों में से एक है। यहां आप प्ले बैक सिंगर, पॉप स्टार, एजेंट्स और प्रोड्यूसर के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसके अलावा, कॉपीराइटर, रिकॉर्डिंग टेक्नीशियन, म्यूजिक थैरेपी, प्रोडक्शन, प्रमोशन, मैनेजमेंट के साथ-साथ परफॉर्मेंस के क्षेत्र में भी करियर की तलाश कर सकते हैं। 12वीं करने के बाद आप बीए इन म्यूजिक कोर्स में एंट्री ले सकते हैं। देखा जाए, तो इस तरह के कोर्स करने वाले स्टूडेंट की आने वाले दिनों में डिमांड रहने की संभावनाएं हैं। हेयर स्टाइल इन दिनों लोगों में फैशन का खूब पैशन है। इसलिए लोग अपने हेयर स्टाइल के प्रति काफी सजग हो गए हैं। यही वजह है कि बाजार में संभावनाओं को देखते हुए कुछ संस्थानों ने इससे जुड़े कोर्स शुरू किए हैं। आप 12वीं पास करने के बाद इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। ब्यूटी कल्चर फैशन के इस दौर में हर कोई सुंदर दिखना चाहता है और लोगों की इसी चाहत की वजह से ब्यूटी कल्चर का कारोबार काफी बढ़ रहा है। यदि आप ऑफबीट करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो ब्यूटी कल्चर से जुड़े कोर्स 12वीं के बाद भी कर सकते हैं। इस फील्ड में आज करियर की बेहतरीन संभावनाएं देखी जा रही हैं। वीडियो प्रोडक्शन इन दिनों वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ी है। कुछ यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट ने वीडियो प्रोडक्शन के जुड़े कोर्स की शुरुआत की है। इसमें छात्रों को स्क्रिप्टिंग, कैमरा हैंडलिंग, वीडियो एडिटिंग, प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन, पोस्ट प्रोडक्शन जैसी जानकारी दी जाती है। 12वीं के बाद वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। रेडियो जॉकी रेडियो के प्रति लोगों की दीवानगी आज भी कम नहीं हुई है। खासकर एफएम रेडियो चैनल्स के आने से रेडियो की लोकप्रियता एक बार फिर शिखर पर पहुंच गई है। एफएम रेडियो चैनल्स की बढ़ते दायरे की वजह से इस क्षेत्र में रेडिया जॉकी के लिए असीम अवसर देखे जा रहे हैं। रेडियो पर म्यूजिकल प्रोग्राम की एंकरिंग करने वाले रेडियो जॉकी की कोशिश होती है कि श्रोता को प्रोग्राम्स के साथ बांध कर रख सकें। यदि आप भी रेडियो जॉकी जैसे एक्साइटिंग करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो दमदार आवाज के साथ कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होनी चाहिए। 12वीं के बाद भी रेडिया जॉकी के कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इंस्टीट्यूट -जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुंबई-एकेडमी ऑफ रेडियो मैनेजमेंट, दिल्ली-एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एेंड टेलीविजन, नोएडा-एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन-एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई लैंग्वेज उदारीकरण के बाद दो देशों के बीच बिजनेस और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का दौर बढऩे लगा है। एेसे में उन लोगों के लिए करियर का नया रास्ता खुल गया है, जो फॉरेन लैंग्वेज की अच्छी जानकारी रखते हैं। फॉरेन लैंग्वेज से जुड़े कोर्स आप 12वीं के बाद भी कर सकते हैं। इस फील्ड से जुडे़ लोगों के लिए ट्रांसलेटर, इंटरप्रिटेटर्स, ऑनलाइन कंटेंट रायटर, टूर ऑपरेटर, इंस्ट्रक्टर आदि के रूप में जॉब के असीम अवसर हैं। मास कम्युनिकेशन करियर के लिहाज से मास कम्युनिकेशन उभरता हुआ क्षेत्र है। अगर भाषा पर अच्छी पकड़ है और अंग्रेजी का ज्ञान भी है, तो 12वीं के बाद मास कम्युनिकेशन से संबंधित कोर्स कर सकते हैं। खास बात यह है कि इससे संबंधित कोर्स में किसी भी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स एडमिशन ले सकते हैं। मास कम्युनिकेशन से संबंधित कोर्स करने के बाद आप जर्नलिस्ट के अलावा, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, कंटेंट राइटर, वेब कंटेंट राइटर आदि बन सकते हैं। फैशन कम्युनिकेशन इन दिनों फॉरेन और डोमेस्टिक ब्रांड की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। इसलिए कंपनियां लोगों को लुभाने के लिए यूनीक ब्रांड आइडेंटिटीज डेवलप करती है और इसके लिए जरूरत होती है फैशन कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स की। वैसे, फैशन कम्युनिकेशन प्रोग्राम उन लोगों को बेहतरीन मौका उपलब्ध करवाता है, जो अपना करियर फैशन बिजनेस, रिटेल मर्चेंडाइजिंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज्म, टेलीविजन, इवेंट मैनेजमेंट आदि में बनाना चाहते हैं। इस कोर्स में आप बेसिक ऑफ डिजाइन, टेक्निकल ड्राइंग, फैशन स्टडीज, प्रिंसिपल ऑफ मार्केटिंग, फैशन स्टाइल, फैशन जर्नलिज्म और पोर्टफोलियो डेवलपमेेंट के बारे में बताया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद स्टूडेंट मार्केटिंग, मैनेजमेंट, एंट्रप्रोन्योरशिप, ब्रोडकास्ट प्रोडक्शन, फैशन जर्नलिज्म, विजुअल मर्चेंडाइजिंग आदि फील्ड में जॉब तलाश सकते हैं। 12वीं के बाद आप फैशन कम्युनिकेशन कोर्स में एंट्री ले सकते है राजनीति विज्ञान यदि आपको राजनीति में रुचि है, तो आप राजनीति विज्ञान को अपना मुख्य विषय चुन सकते हैं। करियर की दृष्टि से राजनीति विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विषय में आप राजनीति की बारीकियों को अच्छी तरह समझ सकते हैं। इस विषय के साथ आईएएस और आईपीएस परीक्षा में भी सफलता पाई जा सकती है। राजनीति विज्ञान सोशल साइंस का हिस्सा है। इस विषय में भविष्य बनाने की चाह रखने वाले युवाओं को चाहिए कि सर्वप्रथम वह यह देखे की उनका इस विषय के प्रति रुझान है या नहीं। इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विभिन्न एजेंसियों और सरकारी विभागों में रखा जाता है। राज्य स्तर पर कई राजनीति विज्ञानी शहरी नियोजन, स्वास्थ्य योजना तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था में रखे जाते हैं। चूंकि राजनीति विज्ञानी के कार्य जटिल होते हैं और सामाजिक समस्याओं का उपयुक्त समाधान ढूंढना कठिन होता है, इसलिए अच्छी सूचना एवं व्यापक ज्ञान होना आवश्यक होता है। दर्शनशास्त्र अगर आप 12वीं के बाद इस सब्जेक्ट में एडमिशन लेते हैं, तो करियर के कई रास्ते खुल जाते हैं। दरअसल, यह सब्जेक्ट स्टूडेंट्स का एमबीए करने की राह दिखाता है। एमबीए करने या सिविल सर्विस परीक्षा में दर्शनशास्त्र को एक विषय के रूप में रखने के लिए स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर स्टूडेंट्स दर्शनशास्त्र की पढ़ाई कर रहे हैं। आट्र्स के विषयों में दर्शनशास्त्र का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि छात्र इसमें लॉजिक की पढ़ाई करते हैं। इसके पेपर कैट या फिर सिविल परीक्षा की तैयारी में मददगार साबित होते हैं। मनोविज्ञान आट्र्स सब्जेक्ट में मनोविज्ञान काफी पॉपुलर कोर्स है। 12वीं के बाद इस कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है। इसमें स्टूडेंट्स 90 फीसदी से अधिक अंक लाकर भी इसलिए दाखिला ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह विषय स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कॉरपोरेट जगत आदि सभी जगह नौकरी का अवसर दिला रहा है। कॉरपोरेट कंपनियों के एचआर विभाग में मनोविज्ञान के स्टूडेंट्स की जरूरत पड़ रही है। अस्पतालों में मनोविज्ञान के विशेषज्ञ या स्कूल में काउंसलिंग के लिए इसकी जरूरत पड़ रही है। स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग अनिवार्य बनती जा रही है, इसलिए जगह-जगह काउंसलर रखे जा रहे हैं। वृद्धाश्रम हों या मनोचिकित्सा से जुड़े संस्थान, सभी जगह मनोविज्ञान के स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी मांग है। इसके अलावा सर्वे और रिसर्च के काम में भी इनके लिए अवसर है। अर्थशास्त्र सबसे ज्यादा जिस विषय के लिए मारामारी मची है, वह है अर्थशास्त्र। बाजारवाद के दौर में राष्ट्रीय कंपनी हो या अंतरराष्ट्रीय कंपनी, बैकिंग हो या फाइनेंस सेक्टर, सभी जगह अर्थशास्त्र के स्टूडेंट्स और एक्सपर्ट की मांग हो रही है। इनकी मांग रिसर्च प्लानिंग, अर्बन मैनेजमेंट, रूरल मैनेजमेंट, फॉरेन ट्रेड, इंटरनेशनल रिलेशंस आदि के क्षेत्रों में हैं। इसके अलावा, डेवलपमेंट बैंकों, कॉमर्शियल बैंकों और इंवेस्टमेंट बैंकों में भी अर्थशास्त्र के स्टूडेंट्स की मांग रहती है। इतना ही नहीं, प्लानिंग कमिशंस और ऑर्गनाइजेशंस, जिनका संबंध डाटा कलेक्शन और इंटरप्रिटेशन से हैं, उन्हें भी इकोनॉमिक्स से जुडे़ स्टूडेंट्स की जरूरत होती है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में करियर बनाने से पहले स्टूडेंट्स यह देख लें कि इस विषय के प्रति उनमें रुचि कितनी है। अगर आपकी रुचि इस विषय में नहीं है, लेकिन आप मार्केट में डिमांड को देखते हुए इस फील्ड में आना चाहते हैं, तो आपको बचना चाहिए। अगर इकोनॉमी से जुड़ी चीजों में आपकी दिलचस्पी है, तभी आप इस फील्ड में कदम रखें। इतिहास इतिहास में वह सब कुछ दर्ज है, जो विश्व की विभिन्न सभ्यताओं ने अपने विकास के क्रम में किया। एक इतिहासकार शिल्प तथ्यों, वस्तु भग्नावशेषों, स्मारक अवशेषों, भवन अवशेषों, प्राचीन मुद्राओं, जीवाष्मों, प्राचीन पुस्तकों, शिलालेखों, मंदिरों, मूर्तियों, ताम्र पत्रों, गुफा चित्रों, ऐतिहासिक घटनाओं के अभिलेखों की पहचान करता है और उनका बारीक अध्ययन करता है। उस संबंध में एक तार्किक और प्रामाणिक निष्कर्ष सामने रखता है। इन्हीं निष्कर्षों के कारण हम यह जान पाते हैं कि अतीत में घटी विभिन्न घटनाओं के पीछे क्या था? 12वीं के बाद इतिहास विषय में स्नातक कर सकते हैं और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी भी कर सकते हैं। इतिहास में ऑनर्स के साथ पास कोर्स भी होता है। इतिहास में जो विषय पढ़ाए जाते हैं, वे इस प्रकार हैं- प्राचीन, मध्य और आधुनिक काल का इतिहास, उसकी शासन प्रणालियों, उस समय के राजवंशों, साम्राज्यों, धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ भाषा व लिपि के बारे में पढ़ाया जाता है। भूगोल 12वीं के बाद आप भूगोल से स्नातक करते हैं, तो करियर के कई रास्ते खुल जाते हैं। आप अर्बन प्लानर के रूप में करियर बना सकते हैं। आज शहरों की योजना बनाने में भूगोल विशेषज्ञों की अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भू-स्वामियों, टाउनशिप बनाने वाली कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है। इस विषय से जुड़े स्टूडेंट्स कार्टोग्राफर के रूप में भी काम करने का अवसर होता है। कार्टोग्राफी (नक्शा बनाना) के कोर्स की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए मीडिया, बुक पब्लिशर, एटलस प्रकाशकों, सरकारी एजेंसियों में बेहतर अवसर हो सकते हैं। इसके अलावा, जीआईएस स्पेशलिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं। आज ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) अथवा जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम के बढ़ते उपयोग से भूगोल के साथ कम्प्यूटर एवं मल्टीमीडिया के जानकार लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढऩे लगे हैं। देश-विदेश में स्थित मौसम के बारे में पूर्व सूचना देने वाली सरकारी सेवाओं के अलावा, मीडिया के मौसम प्रोग्राम, उड्डयन विभाग आदि में मौसम विज्ञान विशेषज्ञ एक्सपर्ट की मांग रहती है। इसी प्रकार शिपिंग कंपनियों में भी इनकी सेवाएं ली जाती हैं। जहां तक कोर्स की बात है, तो ग्रेजुएशन स्तर पर भूगोल से बीए अथवा बीए ऑनर्स कोर्स के बारे में सोचा जा सकता है। इसके बाद एमए (भूगोल) के साथ जीआईएस सरीखे कोर्स को भी साथ-साथ कर सकते हैं। देश की प्राय: सभी यूनिवर्सिटी में भूगोल पर आधारित कोर्सेज हैं। इंश्योरेंस अगर आप ऐसे करियर की तलाश में हैं, जहां आपका भविष्य सुरक्षित हो, तो इंश्योरेंस के क्षेत्र में कदम बढ़ा सकते हैं। इन दिनों इस क्षेत्र में करियर की बेहतरीन संभावनाएं हैं, क्योंकि सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां तो अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर ही रही हैं, विदेशी कंपनियों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। ऐसी स्थिति में यदि आप इंश्योरेंस से जुड़े कोर्स कर लेते हैं, तो आपका फ्यूचर बेहतर हो सकता है। आमतौर पर 12वीं पास स्टूडेंट्स इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। आप चाहें, तो 12वीं के बाद बीए (इंश्योरेंस) में एडमिशन ले सकते हैं। देश के कई प्रमुख संस्थानों में इंश्योरेंस से जुड़े कोर्स उपलब्ध हैं। यहां आप डिप्लोमा, सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री और मास्टर डिग्री कोर्स भी उपलब्ध हैं। कुछ कॉलेज बीए (इंश्योरेंस) कोर्स ऑफर कर रहे हैं, जिसकी अवधि तीन वर्ष है। लॉ 10+2 के बाद लॉ की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। कई यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट कॉलेजों में पांच वर्षीय बीए एलएलबी कोर्स कराया जाता है। एंट्रेंस एग्जाम में बैठने के लिए 10+2 में कम से कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए। देश के विभिन्न ‘नेशनल लॉ स्कूल्स’ में एडमिशन ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ (सीएलएटी) के माध्यम से होता है। अन्य संस्थान लॉ कोर्सेज के लिए अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम्स आयोजित करते हैं। ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ में आमतौर पर इंग्लिश, लॉजिकल रीजनिंग, लीगल रीजनिंग, मैथमेटिक्स और जनरल नॉलेज से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इन दिनों लॉ के क्षेत्र से जुड़े लोगों की मार्केट में अच्छी डिमांड है। देश में अदालतें बेशक कम हों, लेकिन मुकदमों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसीलिए वकीलों की मांग भी बढ़ती जा रही है। देश का कानून इतना व्यापक है कि स्पेशलाइजेशन की जरूरत बढ़ जाती है। बिल्कुल मेडिकल फील्ड की तरह। आप अपनी रुचि के अनुसार, किसी विशेष क्षेत्र के कानून के विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना सकते हैं। यह क्षेत्र एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्सटिट्यूशन लॉ, फैमिली लॉ, इंटरनेशनल लॉ, साइबर लॉ, लेबर लॉ, पेटेंट लॉ, एन्वायरन्मेंटल लॉ, टैक्स लॉ आदि में से कुछ भी हो सकता है। कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस के अलावा, केंद्र व राज्य सरकार की जॉब्स, टीचिंग, कॉरपोरेट कंपनियों में लीगल एडवाइजर के रूप में भी करियर बनाया जा सकता है। इन दिनों लीगल एक्सपर्ट की मांग न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी लगातार बढ़ रही है। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी फोटोग्राफी संचार का एेसा एकमात्र माध्यम है, जिसमें भाषा की जरूरत नहीं होती। शायद ठीक ही कहा जाता है कि एक फोटो दस हजार शब्दों के बराबर होता है। फोटोग्राफी एक कला है, जिसमें विजुअल कमांड के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है और इस कला को वही समझ सकता है, जिसे मूक भाषा आती हो। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी एक एेसा ही फील्ड है, जहां एक तरफ जंगल का रोमांच है, तो वहीं दूसरी तरफ खतरे भी कम नहीं हैं। इसे करियर चुनने से पहले वाइल्ड लाइफ के नियम-कायदों की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है, पर इससे भी ज्यादा जरूरी है क्रिएटिविटी। बारहवीं के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है। फोटोग्राफी का कोर्स सरकारी और निजी स्तर पर कई संस्थान कराते हैं। एक अच्छा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बनने के लिए बेसिक फोटोग्राफी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। हालांकि एक साधारण डिजिटल कैमरा लेकर शौकिया तौर पर शुरुआत की जा सकती है। एक-दो साल का अनुभव हो जाने के बाद डिजिटल एसएलआर खरीद कर प्रोफेशनल एंट्री की जा सकती है। हिंदी अब हिंदी केवस राजभाषा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना रही है। चाहे वह अध्यापन का कार्य हो या कॉल सेंटर्स, टूरिज्म और इंटरप्रेटर का, सभी में अवसर ही अवसर हैं। 12वीं के बाद आप हिंदी ऑनर्स कर सकते हैं। हिंदी से बीए व बीएड करने के बाद स्कूलों में हिंदी अध्यापक की नौकरी मिल जाती है। कॉलेज के स्तर पर अध्यापन करने वाले छात्रों को एमए के बाद एमफिल और पीएचडी करने के बाद कॉलेज में प्रवक्ता का पद मिल जाता है। पीएचडी होल्डर कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर देश में कहीं भी लेक्चरर की नौकरी पा सकते हैं। अध्यापन के लंबे अनुभव पर वे रीडर व प्रोफेसर भी बन सकते हैं। हिंदी से स्नातक करने वालों के लिए मीडिया एक बड़ा अवसर लेकर आया है। फिल्म और टीवी सीरियल में भी आप अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। यदि आपको शब्दों से खेलने में मजा आता है, तो आपको यहां भी काम मिल सकता है और आपकी कल्पना उड़ान भरती है, तो स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर आप यहां कोशिश कर सकते हैं। हिंदी भाषा और साहित्य के छात्र लिंग्विस्टिक का भी कोर्स कर सकते हैं और अच्छी नौकरी पा सकते हैं। इसके साथ ही अगर हिंदी में अच्छी पकड़ है, तो क्रिकेट कमेंटरी से लेकर फैशन जगत व एड एजेंसी और एनजीओ में भी करियर बनाया जा सकता है।
2019-02-25T11:03:54

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नर्सिंग क्षेत्र में कैरियर के अवसर.. डॉक्टरों को दूसरा भगवान कहा जाता है, क्योंकि मरीजों को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है, लेकिन इसमें नर्स की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता है। देखा जाए, तो मरीजों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी इनके ऊपर ही होती है। तभी तो इन्हें सभी प्यार से 'सिस्टरÓ भी कहते, लेकिन अब भारतीय सिस्टर विदेश का रुख करने लगी हैं, क्योंकि विदेशों में इन्हें जॉब के साथ-साथ बेहतर सैलॅरी भी मिलने लगी है। पहले यह माना जाता था कि आईटी, प्रबंधन आदि से जुड़े लोग ही विकसित देशों में जॉब कर सकते हैं, लेकिन अब परिदृश्य तेजी से बदलने लगा है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में भी इस सेवा के लिए अनंत संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। अब तो केवल भारत में ही वर्ष 2012 तक दस लाख से अधिक नर्सों की जरूरत होगी। आज जितनी तेजी से हेल्थकेयर सेंटर का विकास हो रहा है, इससे इस क्षेत्र में जॉब की असीम संभावनाएं खुलने लगी हैं। क्या कहते हैं आंकड़े हेल्थ मिनिस्ट्री के एक अनुमान के मुताबिक 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) तक भारत में 10.43 लाख के करीब नर्सों की जरूरत होगी। लेकिन जिस तरह का मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर है, उसे देखते हुए करीब 6.84 लाख नर्स ही उपलब्ध हो पाएंगे और 3.59 लाख नर्सों की कमी महसूस की जाएगी। फिलहाल इंडिया में डिमांड और सप्लाई में काफी अंतर है। हेल्थकेयर क्षेत्र में विस्तार के कारण उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी नर्स की मांगों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। दरअसल, नर्स की कमी का आलम यह है कि एक डॉक्टर के साथ कम से कम तीन नर्स की जरूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में यह अनुपात घटकर 1:1.5 के करीब रह गया है। जॉब ऑप्शन आप 10वीं और 12वीं करने के बाद भी नर्सिंग के कोर्स में दाखिला ले सकती हैं। इस कोर्स की सफलतापूर्वक समाप्ति के बाद आपके लिए जॉब के कई रास्ते खुल जाते हैं। दरअसल, इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज जॉब की कोई कमी नहीं है। आप हॉस्पिटल, नर्सिंग होम्स, क्लीनिक और हेल्थ डिपार्टमेंट, ओल्ड एज होम्स, मिलिट्री हेल्थ सर्विस , स्कूल्स, रेलवे, पब्लिक सेक्टर मेडिकल डिपार्टमेट आदि में कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा, आप साइकिएट्रिक नर्स (इमोशनल और साइकोलॉजिकल मरीज की देख-भाल), पीडिएट्रिक नर्स (छोटे बीमार बच्चों की सेवा) और ऑर्थोपेडिक नर्स के रूप में भी कार्य करने के अवसर मौजूद हैं। विदेश में अवसर यदि आप इस क्षेत्र से जुड़ी हैं, तो आज यूरोपियन कंट्री, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और गल्फ कंट्री में जॉब की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही इन देशों में आकर्षक सैलॅरी पैकेज के साथ ओवरटाइम भी मिलता है। यही वजह है कि भारतीय नर्स परदेश का रुख करने लगी हंै। लेकिन यूरोप और अमेरिका जाने के लिए सीजीएफएनएस (कमीशन ऑफ ग्रेजुएट ऑफ फॉरेन नर्सिंग स्कूल), टीओईएफएल (टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज), टीडब्ल्यूई (टेस्ट ऑफ रिटन इंग्लिश) और टीएसई (टेस्ट ऑफ स्पोकेन इंग्लिश) के एग्जाम के दौर से होकर जुडऩा पड़ सकता है। यदि आप अमेरिका में यह जॉब करना चाहती हैं, तो सीजीएफएनएस एग्जाम को क्वॉलिफाई करना जरूरी होता है। किंतु इसके लिए देश में दो ही सेंटर-बेंगलूर और कोची में है, जहां से सीजीएफएनएस सर्टिफिकेशन प्रोग्राम कर सकते हंै। विदेशों में इस जॉब का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन नेशनल हेल्थ सर्विस ही प्रतिवर्ष एक हजार से अधिक भारतीय नर्स को रिक्रूट करती है। कुल मिलाकर देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी नर्सिंग से जुड़े लोगों के लिए बल्ले-बल्ले वाली स्थिति है। सरकारी प्रयास सरकार नर्सिंग एजुकेशन में व्यापक सुधार के लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 319 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए हेल्थ मिनिस्ट्री ने 230 जिलों की पहचान की है, जहां ऑग्जिलयरि नर्स मिडवाइव्स (एएनएम) और ग्रेजुएट नर्स मिडवाइव्स (जीएनएम)इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। इसके अलावा, चार रीजनल इंस्टीट्यूट में नर्सिंग की शिक्षा को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। सच तो यह है कि आज नर्स हेल्थ केयर सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सैलॅरी ऑफर नर्स की सैलॅरी उनकी योग्यता और अनुभव पर भी निर्भर करता है। सरकारी हॉस्पिटलों में सैलॅरी 6, 500 से 10, 000 हजार रुपये के करीब हो सकती है। लेकिन प्राइवेट और मिलिट्री सर्विस में कार्य करने वालों की सैलॅरी कुछ अधिक होती है। कुछ टॉप हॉस्पिटल्स u India Institutes of Medical Sciences www.aiims.edu u Apollo Hospitals www.apollohospitals.com u Escorts heart institute & Research center www.ehirc.com u Pd Hiduja National Hospitals & Research center www.hidujahospitals.com u Sir Ganga Ram Hospital www.sgrh.com u Tata Memorial Hospital http:tmc.gov.in आप इन हॉस्पिटल्स में बेवसाइट के माध्यम से जॉब से संबंधित अधिक जानकारी एकत्रित कर सकते हैं।
2019-02-23T12:01:50

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Career counselling is an essential factor for identifying the real potential and guiding students towards a right career path. Students need to know the importance of career coaching and right guidance before they are going to choose an academic stream after taking the board exams. Career counselling will be helpful choosing a career goal, planning and give a direction to students for a better future ahead. Read here significance of career counselling and proper guidance for school students – What is Career Counselling? In current times, career counselling is a need as most students pick commonly known domains as their career option. Career counselling is an effort for students’ career guidance right from their school about the available career options as per their interest and stream of academics. Through career counselling, an analysis can be done for students which will help them find out their interests and also their strengths and weaknesses. Why is career counselling important for high school students? Career counselling should be done in the school itself for class 9-11 students specifically because these are the levels where students choose a particular stream as their specialisation and also, it will be helpful for them to decide the stream they should opt for. This is because many students are not satisfied with the stream they choose and tend to change it; this happens in absence of proper guidance about options available as per their interest and different education stream. Nowadays, many counsellors prefer psychometric tests to analyse interests of students because generally, students are confused between their various interests but these psychometric tests help figure out students’ capabilities towards each of their interest. With career counselling, students would be able to know – Their aptitude and interests Strengths and weaknesses of a particular interest Making choice of stream for education after class 10 Career options available in market as per their academic choice Career options available as per their interest Some alternate career options if they decide to change their stream in future. How can students get career guidance or career coaching? Career coaching or counselling does not only require professional counsellors but it can be done as mentioned below – Be your own career coach –Who knows better about your interests, your hobbies, your personality and your academic interests than you. You can analyse the below-mentioned facts to find your career goals and help yourself in achieving them – Your interest Academic profile Career options available as per your interests and education qualification Also, seek suggestions from your friends and parents to get better advice about career options. Write down all these points in a notebook and filter out the best suitable option for yourself. Seek advice from your parents –Your parents have been the primary coach for your education and career life. They got you admitted in best suitable kindergarten, primary school and now when you need to decide the stream choice and career, they should be the first one to advise you and help you decide the best alternative. After you, your parents know the best about your aptitude and capabilities, so they will be able to guide you best in making education as well as a career choice. Proper guidance from your teachers – The third person after you and your parents who will be able to help you decide the best alternative to a career is your teacher. You have been handled, guided and improved over the years by your school teachers. So, they have complete knowledge about your capabilities . A career coach in your friends or your elder siblings – Your friends or your siblings know your interests because you can open up before them without an uneasiness which you may feel with your parents or your teachers. Your elder brother or sister will be the best to advise you on the matter of choosing a career because they themselves have gone through the same situation and have faced the same doubts regarding the career choices. And your friends who will be making career choice along with you also are seeking guidance for their career choices, therefore; they will be helpful by sharing.
2019-02-23T11:40:05

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ABOUT NWAC/AdvancED The Northwest Association of Secondary and Higher Schools was formed as a voluntary organization on April 5, 1917 with a membership of 25 secondary schools and eight higher institutions in four Northwestern states. By December 2007, this membership increased to over 1900. Presently, the organization accredits in seven states: Alaska, Idaho, Montana, Nevada, Oregon, Utah, and Washington. In December 1974, the title of the organization was changed to: Northwest Association of Schools and Colleges. In December 2001, the association's name was changed to the Northwest Association of Schools and of Colleges and Universities, and on February 1, 2004 the association's name was changed to the Northwest Association of Accredited Schools. In 2010, as a result of a restructuring plan, the name was changed to Northwest Accreditation Commission. GEOGRAPHY The Northwest Commission's geography has significantly changed over the years. In 1988 the association was strictly bound to the seven state northwest region. The association joined the other five regional accrediting associations in 1991 as volunteer Council of Regional School Accrediting Commissions to expand our borders to include "national schools" outside the United States. The Northwest's national school accreditation effort began in 1992 with Togliatti, Russia. The accreditation of "national schools" is seen as a virtue and need as the United States participates in a global economy and as English becomes even more of an international language. Additionally, the Commission's expertise has been sought for the accreditation of distance education schools throughout the country. THE COMMISSION The commission had a long and worthy association with the colleges' commission that dates back to 1917. The two commissions used to meet together for the annual meeting of the association until 1994. As times changed and needs changed so did the organizations. The next evolution in relations between the schools' commissions and those of higher education led to two regions separately incorporating their commissions, retaining only the regional name for identification purposes. In the resolution to the Commission on Schools and from discussions over the preceding ten years, the idea to separate was largely promulgated by the growing fact that there were few issues of mutual interest for the two commissions. It was a national trend. THIRD-PARTY ACCREDITATION In 1998 the Northwest Association developed the notion of third-party accreditation. Working with the Strategic Planning Committee, the Northwest association developed the 15 points of quality assurance that third-party agencies must provide evidence that they "equal or exceed" existing commission expectations for accreditation. After meeting with some of the agencies that would be impacted (PNAIS, NLSA, SDA, and others), NWAC devised a practical protocol for implementing the third-party accreditation program. Nine third party agencies are approved: PNAIS, NIPSA, NLSA, SDA, ACSI, CSI, ACTS, WCEA, and NAEYC. Currently, nearly ten percent of NWAC member schools are third-party accredited. The third-party (now titled NW Partners) accreditation concept proved to be a vital, progressive and necessary element of our modern accreditation system that was designed to ensure efficacy while minimizing effort. EBSE The partial success of the School Improvement Plan format brought about the concept of Evidence-Based School Evaluation (EBSE). EBSE was a comprehensive and integrated approach to accreditation. All documents and forms follow a common format and identification system. The Revised Accreditation Standards were piloted by all member schools as a part of the fall 2006 annual reporting process. NORTHWEST ACCREDITATION COMMISSION In the spring of 2010 the membership of the Northwest Association of Accredited Schools approved a plan offered by the Strategic Planning Committee to restructure the Commission. As a result of the restructuring, the Northwest Association of Accredited Schools became the Northwest Accreditation Commission. Each of the State Accreditation Committees along with the International and Transregional Accreditation Committee had representatives serving the interests of member schools. A new logo was designed with the acronym NWAC. AdvancED On December 5, 2011, the NWAC and Board of Trustees voted at the annual meeting to approve new bylaws that officially made NWAC a division of AdvancED. Beginning July 1, 2012 all operations of NWAC are under the governance of AdvancED through its Northwest Regional Office.
2019-02-23T07:14:13

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Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (BAMS) is an integrated Indian Degree in the medical field. This degree programme is conferred to those students who studied the modern medicines and traditional Ayurveda. Ayurveda is one of the ancient medical systems of the world. It traces its roots to the Vedic period. It is not only providing the cure but also prevent the recurrence of diseases. According to the Ayurvedic, there are only three kinds of dysfunctions or disorders in human body Kapha, Pitta and Vata. These dysfunctions are commonly called as the Dosha in Ayurvedic terminology. Kapha meant Phlegm (water and earth), Pitta meant Bile (fire & water) and Vata meant Wind (air and space). Ayurvedic says that a person got ill when he gets out of the harmony of said three doshas. ADMISSION OPEN 2019 Dev Bhoomi Group of institute Dehradun......................Apply Now The Ayurvedic system of medical care is based on the concept where the natural healing capacity of the body is being enhanced by the Ayurvedic therapy. The Ayurvedic treatment includes the reducing symptoms, eliminating impurities, reducing worry, increasing resistance of disease and increasing harmony of patient’s life. The Ayurvedic system is a trustful medical system in order to the cure, prevent and rejuvenate. Yes, it takes more time to make the patient fit as before, but once the patient has been treated through this medical system, he will find him better than before he was. In short……. “BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) is an undergraduate degree programme in old and ancient Ayurvedic medical system containing the prevention and cure to the body by increasing the harmony of kapha, pitta and vata”. BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) is the opening degree in Ayurvedic medicine and surgery system, treating the humanity since long past. Get Latest Career Notification about BAMS course, by entering your details below: Name* Mobile* Email* State* Course Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery (BAMS) is a graduate degree course in Ayurvedic system. This degree is awarded after the completion of 5 years and 6 month degree programme containing the 4 and 1/2 year academic session and one year internship programme with live practical. The UG degree course is separated in three sections of 1.5 years each. These sections called as the three professional courses. In first professional course the students are taught about the anatomy, physiology and history of Ayurvedic system. In second course they are taught about the toxicology and pharmacology and the final course contains the surgery, ENT, skin, obstetrics and gynaecology. The entire course contains the modern anatomy, principles of medicines, physiology, social and preventive medicines, forensic medicine, principle of surgery, toxicology, ENT, botany and pharmacology. The graduates use the title “Vaidyar” before their name (abbreviation is Vr.) Also Check: Courses after 12th Specializations: The specializations in this field are as the following: Padartha Vigyan Sharir Rachana Sharir Kriya Swasth Vritta Rasa Shastra Agad Tantra Rog & Vikriti Vigyan Charak Samhita Prasuti and Stri Roga Kaumara Bhritya Kayachikitsa Shallya Tantra Shalakya Tantra Charak Samhita Eligibility & Admission The basic requirement for the eligibility to get the admission to BAMS programme is qualifying the 10+2 examination with science stream. The candidate must have the physics, chemistry and biology in 12th class. Career & Jobs Day by day, the scope of Ayurvedic is overlapping to the other medical system not only in India but also in the world. In many cases the people have taken the experience for the trustfulness of the Ayurvedic system and medicines treating for the chronic and non-healable disease. In many cases, when the allopathic system becomes a failure with a particular disease and surrenders, the Ayurvedic medicine does the magical effect to rejuvenate the illness or the patient. The career opportunity after the completion of BAMS is not only in India but also in foreign countries. Many organizations are working in the manufacturing and research field in abroad are requiring the professional in this field. The candidate having the BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) degree is eligible to be called as a doctor and eligible to do the private practice. Job opportunities also exists in government sector. One can get job in government ayurveda hospital as ayurvedic pharmacist. After the completion of this course, candidates also have opportunity to open their own retail shop of Ayurveda medicines. Teaching field is also open for BAMS graduates. They can find employment in private and government ayurveda Institutes. Job profiles: The job profiles after completing the BAMS programme are as the following: Lecturer Scientist Therapist Category manager Business development officer Sales representatives Product manager Pharmacist Jr. clinical trial coordinator Medical representative Ayurvedic doctor Sales executive Area sales manager Assistant claim manager health Manager – internal audit Salary The salary in the medical field is the benchmark for other job profiles in different field. Some universities provide the stipend around 40 thousand to 50 thousand per month to the post-graduate doctors in Ayurvedic field. In the job an Ayurvedic professional may get the salary from Rs. 20, 000 to Rs. 50000 according the role and nature of his/her job profile. Recruiters or Employers: Here some of the employment areas for the professionals who have done the BAMS programme: Clinical trials Healthcare community Life science industries Pharmaceutical industries Education Healthcare IT Insurance On duty doctor Nursing home Spa resort Ayurvedic resort Panchkarma ashram Government/ private hospitals dispensaries colleges research institutes
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